रहस्यमयी रूबी
मेरा नाम जो हन्टर है। मैं २५ साल का इसाई युवक हूँ। मुझे घूमने फ़िरने का बहुत शौक है। इन गर्मी के दिनो में मुझे यह मौका मिल गया। हम सभी लोग जयपुर में एक जगह एकत्र हो गये थे। वहां से हमें बस में जाना था। हम सभी करीब १७ लोग थे। ज्यादातर जोड़े में थे। पर मैं अकेला ही था।
बस रात को लगभग १० बजे रवाना हुई। ऊपर वाले सभी स्लीपर थे और नीचे सीटें थी। मुझे सिंगल वाला स्लीपर मिल गया था। सुबह होते होते हम लोग उज्जैन पहुँच गये थे। यहां पर हम होटल में रुके थे। मुझे कमरा नम्बर २० मिला था।
मैं अपने कमरे में गया और नहा धो कर फ़्रेश हो गया। चाय पी कर सभी लोग घूमने निकल पड़े। मैंने उज्जैन देखा हुआ था इसलिये मैं पास में फ़्रीगन्ज मार्केट चला गया। पर जल्द ही वापस आ गया।
मैने होटेल के काऊन्टर पर देखा तो वहां पर एक खूबसूरत सी लड़की खड़ी थी। उसे देखते ही मैं पहचान गया। मैने अपने कमरे की चाबी मांगी। उसने मुझे १९ नम्बर की चाबी दी। मैने कहा,”अरे… रूबी तुम…!”
“हाय……जो…तुम हो…”
“ये तो १९ नम्बर की है……।”
“हा ये मेरा कमरा है… तुम चलो मैं आती हू।” रूबी मुस्करा कर बोली…
हम दोनो विद्यार्थी जीवन से साथ थे। मैं मन ही मन ही मन में रूबी को चाहता था, पर माईकल को यह पसन्द नहीं था।
“ओह्…हाँ………”
मैने चाबी ली और आराम से सीढियां चढ़ता हुआ कमरा नम्बर १९ पर आ गया। मैने चाभी लगा कर दरवाजा खोला। कमरे में एक अजीब सी ठन्डक थी। एकाएक मैने देखा कि रूबी कमरे में मेरे सामने खड़ी थी। एक झीना सा नाईट गाऊन पहने हुई थी। जिसमें उसका पूरा नंगा बदन नज़र आ रहा था। इतनी बेशर्मी से मै सकपका गया।
“तुम अन्दर कैसे आई…?”
“पीछे से ……दरवाजा तो बन्द कर दो… देखो मैं तो ……कोई देख लेगा ”
“अंह्…… हां …… पर ये क्या… तुम ऐसे …… ?” वास्तव में मै भौचक्का रह गया था।
“आओ ना…थोडी मस्ती करेंगे………भूल गये क्या सब……”
मै कैसे भूल सकता था भला……… हम दोनो एक साथ घूमने जाया करते थे …… मौका मिलने पर वो कभी मेरे लन्ड को मसल देती थी और कभी मेरी गान्ड पर थपथपाती थी। मुझे उसकी इस हरकत पर शरीर में सनसनी दौड जाती थी। मै भी मौका पाकर उसके उरोजो को दबा देता था। उसके नरम नरम चूतड़ों को दबा देता था। उसके नरम चूतड़ मुझे बहुत ही सेक्सी लगते थे। पर मुझे उसे चोदने का अवसर कभी नहीं मिला था।
आज ये अचानक सब कैसे हो गया। मेरी किस्मत अचानक ही कैसे खुल गयी। मै सीधे उसके पास आ गया और जोश में उसे जकड़ लिया। उसके ठन्डे बदन से मुझे एकबारगी झुरझुरी आ गयी। उसके ठन्डे होठ मेरे होन्ठो से चिपक गये। उसके मखमली बदन का अहसास मेरे जिस्म में होने लगा। मेरा लण्ड तन गया था। उसके नरम और ठन्डे बदन को मैं सहला रहा था। वो भी मेरे बदन से ऐसे लिपट रही थी कि कहीं मैं उसे छोड़ कर ना चला जाऊँ। मेरा लन्ड बहुत टाईट होता जा रहा था। मेरे बदन में सिरहन बढती जा रही थी। मेरा लन्ड रह रह कर चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था। रूबी बोली -”रुको……ऐसे नहीं……… तुम लेट जाओ…… और उतारो ये पेन्ट और कमीज………”
मै अपने कपड़े उतार कर उसके सामने नंगा हो गया। उसके मुँह से सीत्कार निकल गयी।
“जोऽऽऽऽऽऽ …… हाय रे……… तुम तो गजब के हो … तुम्हारा ये बोडी …… कहां छुपा रखा था ये बदन………”
“मै तो शुरु से ही ऐसा हूं ………क्यो ऐसा क्या है……” मुझे उसकी इस प्रतिक्रिया पर थोडी हैरानी हुई।
उसने कुछ नहीं सुना… बस मेरे नंगे बदन से लिपट गयी। मेरी तरफ़ उसने सेक्सी निगाहों से देखा और अपना झीना सा गाउन नीचे उतार फ़ेंका। मेरी नजरें उस से मिली। उसकी आखों में वासना के लाल डोरे खिन्चने लगे थे।
मेरे मुँह से भी निकल पड़ा -”हाय… ये चिकना चमचमाता शरीर……… रूबी ………जान लोगी क्या……” वो मुसकरा उठी।
रूबी ने अपने ठन्डे हाथों से मेरा लन्ड पकड लिया। अब वो मेरे लन्ड से खेल रही थी। मेरा लन्ड फ़ूल कर मोटा और कडक हो गया था। उसने मेरे सुपाडे की चमडी खींच कर उसे खोल दिया। अब वो उसे उपर नीचे कर रही थी। मुझे मीठी मीठी तेज गुदगुदी होने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़ना चाहा तो उसने प्यार से मेरा हाथ हटा दिया और मेरे लन्ड को पकड़ कर मुठ मारने लगी। मेरे सारे शरीर में सनसनाहट होने लगी।
“रूबी……… हाय……… मजा आ रहा है … और मुठ मार …… हाय……आज तो बस ऐसे ही मेरा रस निकाल दे रूबी………”
उसने मुठ मारते मारते अपने मुंह में सुपाडा ले लिया। उसके नाखून मेरे शरीर पर खरोन्चे मारने लगे। उत्तेजना में सब अच्छा लग रहा था। उसके हाथ और तेज चलने लगे… मुंह से लन्ड चूसने की मधुर आवाजें आ रही थी। उसके बाल लहरा रहे थे। मुठ मारती जा रही थी… रूबी का जिस्म भी कम्पकंपा रहा था। उसके पीछे उभरे हुये गोल गोल चूतड़ों को मैं मसल रहा था।
“राजा ……… मजा आ रहा है ना……” उसके नाखून मेरे शरीर पर खरोन्चे मार रहे थे। मै चरम सीमा पर पहुच रहा था। वो उतना ही तेज रगडने लगी थी। अब वो अपने दान्तो से मेरा सुपाडा भी चबा लेती थी। अन्तत: मैं मचल पडा…मेरा लन्ड से पिचकारी छूट पडी।
उसके चेहरे पर पर गाढ़ा गाढ़ा सा सफ़ेद वीर्य लिपट गया। उसने बेहिचक वीर्य को चाट चाट कर साफ़ कर दिया। रूबी उठी और बाथरुम में चली गयी। अपना मुँह साफ़ करके मेरे पास आ गयी।
“मजा आया जो…… तुम्हारा लन्ड… लगता है बडे प्यार से पाला है…।”
मै हंसने लगा……
तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया …… मैं उठा और पेन्ट पहन ली ।
मैने दरवाजा खोला तो वहां कोई नहीं था। मैने पीछे मुड़ कर देखा तो रूबी भी वहां नहीं थी। इतने में एक बूढा वेटर सामने के कमरे से निकला। मुझे देखते ही वो चोंक गया।
“सर … आपका कमरा तो २० नम्बर है……”
“ना…… नहीं… मैं तो यहां…।”
उसने मेरा रूम खोल दिया…। “आईये ……… उस कमरे में किसी भी हालत में मत जाना………”
” अच्छा …ठीक है ठीक है ……” मै हंस दिया।
मैने अपने कपड़े उठाये और अपने कमरे में आ गया। बूढे वेटर ने १९ नम्बर में ताला लगा दिया। मुझे पता था कि रूबी पीछे से निकल गयी होगी।
मै बिस्तर पर जा कर लेट गया। पता ही नहीं चला कि कब नीन्द ने आ घेरा। अचानक मेरी नीन्द खुल गयी। देखा तो रुबी अपने हाथ से मेरे शरीर को सहला रही थी। मै उठ कर बैठ गया। उसके सहलाने से मेरे लन्ड में तरावट आने लगी थी।
“तुम … यहां कैसे आ गयी ? दरवाजा तो बन्द था…”
“हाय।…… मेरे राजा……… वैसे ही … जैसे वहां आयी थी……”
“अच्छा ये बताओ कि माईकल का क्या हुआ… उसने तुमसे शादी नहीं की……तुम्हे तो वो बहुत प्यार करता था…”
” पर मै उसे इतना सा भी नहीं चाह्ती थी…… मै तो तुमसे प्यार करती थी…… और तुम ऐसे निकले कि मुझे छोड कर चले गये”
“पर शादी की बात तो उस से चल रही थी ना……”
“मुझे नहीं करनी थी शादी …उन्होने मुझे बहुत मारा पीटा… पर मै नहीं मानी……माईकल ने तो…अब क्या कहूं…… और फिर मजबूरन ……”
“क्या मजबूरन…… बोलो…”
“अरे… छोड़ो ना……इस मस्ती के समय में अच्छी बातें करो… मुझे तो तुम्हारा लन्ड बहुत प्यारा लगा……”
उसने मेरा पेन्ट खीच लिया……… फिर से मुझे नन्गा कर दिया। उसने भी बिना समय बरबाद किये अपना गाउन उतार फ़ेन्का। एक बार फ़िर से हम दोनों नन्गे थे।
“मेरे राजा… जल्दी करो…ऐसा मौका बार बार नहीं आता है……” उसने अपना शरीर मेरे शरीर से रगडना चालू कर दिया। फिर से हम एक बार वासना की दुनिया में पहुंचने लगे। उसके तीखे नाखून फिर से मेरे अंगों पर चुभने लगे… पहले की नाखूनो की जलन अब भी थी। पर उत्तेजना के कारण अब मह्सूस नहीं हो रही थी । मेरा लन्ड एक बार फिर उफ़न पडा…… मीठी सी जलन बढने लगी। उसके होन्ट मेरे होन्टो से चिपक गये। उसकी आंखे लाल हो उठी।
उसक शरीर जल उठा। उसके बदन में एक कडापन आ गया…। उसके उरोज कडे हो गये थे। मेरा लन्ड अब बहुत ही कडा हो गया था। मुझसे अब और नहीं सहा जा रहा था। मेरा लन्ड उसकी चूत में घुसने को बेताब होने लगा था। मैने थोडी सी हरकत करते हुये अपना लन्ड उसकी चूत में ठेल दिया।
“आऽऽऽह्……… जो … घुस गया रे …… सोलिड लन्ड है…… दे …धक्का मार यार।…”
‘ मेरी रूबी …… आऽऽऽऽऽ ह …… बहुत चिकनी है रे ……” लन्ड सरकता हुआ चूत में अन्दर तक बैठ गया।
“राजा…तुम्हरे लिये ही सम्हाल कर रखी थी……” उसकी लाल लाल आंखो मै वहशीपन साफ़ झलक रहा था। तभी उसने मेरा लन्ड बाहर निकाला और उसने तुरन्त मुझे उठाया और खुद घोड़ी बन गयी।
“राजा मेरी गान्ड मारो …। बडी बैचनी लग रही है…… देखो ना……सिर्फ़ तुम्हारे लिये मैने इस गान्ड को कुंआरी रखी है।”
मुझे होश कहां था। मेरा लन्ड कडकता जा रहा था… मेर सुपाडा भी गीला हो रहा था। मैने उसके चूतडो की फ़ान्को को खोला और उसकी गान्ड के छेद पर लन्ड रख दिया। और……वो चिल्ला उठी…।
“धक्का दे जोऽऽऽऽ … घुसेड़ दे लन्ड को……”
‘उसने अपनी गान्ड का छेद को हाथ से फ़ैला दिया। उसका छेद पूरा खुल गया। मैने लन्ड जोर लगा कर अन्दर बैठा दिया। मुझे उसकी गान्ड के छेद नरम लगा। बडी आसानी से…, बिना किसी तकलीफ़ के अन्दर घुसता चला गया। इतना कि मेरा पूरा लन्ड ही अन्दर चला गया। तभी उसने अपनी गान्ड सिकोड़ ली। इतनी जोर से सिकोडने से मेरे लन्ड पर चोट लग गयी। पर उसका चिल्लाना जारी रहा।
“चोद दे राजा …आऽऽऽह्……… मजा आ रहा है…” मै दर्द के मारे तडप उठा। उसकी गान्ड का कसाव तकलीफ़ दे रहा था।
“रूबी………… ढीला करो… क्या कर रही हो……”
‘उसने पीछे मुड कर मुझे देखा…और अपनी गान्ड ढीली छोड दी… उसकि आंखो में एक वहशीपन था…। उसकी आंखों में जैसे खून उतर आया हो। वो एक कुटिल मुस्कान देती हुयी बोली…”राजा… बडी प्यासी है मेरी गान्ड……प्लीज्… लगाओ धक्के पर धक्का…… आज प्यास बुझा दो मेरी…।”
मैने उसकी गान्ड चोदनी शुरु कर दी। वो भी अपने चूतड़ों को हिला हिला कर साथ दे रही थी। मै अपने होश खोता जा रहा था। मै उसकी गान्ड मराने कि स्टाइल पर फ़िदा हो गया… अब उसकी गान्ड मक्खन की तरह नरम लग रही थी। मुझे लगा कि मैं चरमसीमा पर पहुँचने वाला हूँ तभी रूबी ने गान्ड से लन्ड निकाल दिया।
शायद वो जान गई थी कि मैं थोडी देर में झड़ जाऊंगा। और लन्ड गान्ड से निकाल कर अपनी चूत में घुसा लिया……
” हाय मर गयी ……” रूबी के मुह से सिस्कारी निकल पडी। चूत पूरी गीली थी…… लन्ड सरकता हुआ अन्दर चला गया। मेरे लन्ड में तेज गुदगुदी उठी… ये उसकी कसी हुई चूत का कमाल था। लन्ड पूरा अन्दर घुस कर जैसे ही बाहर निकला … रूबी के मुँह से तेज सिस्कियां निकलने लगी। उसे देख कर मेरा लन्ड भी पिघलने लगा………लन्ड के अन्दर बाहर चलने की मेरी रफ़्तार बढ गयी। जोर लगा कर लन्ड पेलने लगा…। उसके चूतड़ जोर से उछल उछल कर मेरा साथ दे रहे थे।
“हाय…राजा……कस के चोद दे…………दे रे जोर से धक्के दे…… मेरी फाड़ दे………… हाय रे………”
वो पागलो की तरह चुदा रही थी। जैसे कि आगे अब उसे चुदने को नहीं मिलेगा। मेरी अब सहनशीलता खतम होती जा रही थी… पर जैसे रूबी सब जानती थी। स्खलित होने के अन्दाज में वो चीख उठी…”राजा मै तो गयी………… लगा दे पूरा जोर…। निकाल दे मेरा पानी……… हाय रे……… मै तो गयी…॥”
“रानीऽऽऽऽ मैं भी गया…। मेरा भी निकला … हाऽऽऽऽऽऽऽऽ निकला ओओओऽऽऽऽऽऽ……”
रूबी झड़ने लगी थी ………… मेरा लगभग उसके साथ ही वीर्य निकल पडा। वीर्य निकलने के साथ ही मेरा सारा जोश ठन्डा पडता जा रहा था। अचानक मेरी नजरे उसकी चूत पर पडी।
उसमें से वीर्य के साथ खून भी आ रहा था…। मै खुश हो गया कि रूबी अब तक मेरे लिये कुँआरी थी। रूबी ने अन्गडाई ली और तुरन्त उछल कर बिस्तर से नीचे आ गयी। उसने नीचे देखा और उसने अपनी चूत से खून भरा वीर्य टपकते देखा और हंसती हुयी बोली -
“जो… मजा आ गया राजा…फिर कभी मौका मिलेगा तो मै तुम्हारे पास प्यास बुझाने आउंगी…। देखो मना मत करना………। नहीं तो……………।” उसने मुझे तिरछी नजरो से घूरा। मैं सहम सा गया। फिर वो बाथरूम में चली गयी। मै थोडी देर बैठा रहा। अचानक मेरे लन्ड में दर्द उठा। मैन देखा तो मेरे लन्ड से खून की बून्दे टपक रही थी। लग रहा था कि लन्ड की कोई नस फ़ट गयी है…। या कोई चोट लग गयी है। लन्ड की त्वचा जगह जगह से फ़ट गयी थी। तो वह खून उसकी चूत में से नहीं… मेरे लन्ड का था……।
मै बाथरूम में गया तो वहां कोई नहीं था……… न कोई खिड़की …न कोई दरवाजा… न कोई रोशनदान…। ये क्या हुआ…। कहां गयी रूबी……। मैंने अपने लन्ड को पानी से धोया। मैने पेन्ट पहना और बाहर आया। वही बूढ़ा वेटर वहाँ से निकल रहा था। मैंने उसे बुलाया,”वेटर … सुनो…… यहां पर काउन्टर पर जो लड़की बैठती है …वो रूबी नाम है…”
“ज़ीऽऽऽ क्या कहा आपने… हमारे होटल में कोई लडकी काम नहीं करती है………” वो बचता हुआ आगे जाने लगा।
“अरे वो … जिसका कमरा नम्बर १९ है…………”
“देखिये साहब … कमरा नम्बर १९ हम किसी को नहीं देते हैं………… वहां पर किसी ईसाई लडकी ने आत्महत्या कर ली थी…। मैने नहीं कहा था, इस कमरे में मत जाना…।”
“नही…… नहीं……कमरे की नहीं… मै रूबी की बात कर रहा हूँ………वैसे उस कमरे में ऐसा क्या है…” उसने मुड कर मुझे देखा ……और उसका स्वर कमजोर हो गया……
“हां… मै जानता हूँ…तुम्हें भी… तुम जो हन्टर हो ना…तुम रूबी ही की बात कर रहे हो……और कमरा……उसके कमीने प्रेमी ने उसका बलात्कार यही किया था………।”
मै सुन कर सन्न रह गया ………… तो क्या माईकल ने………… उसे रूबी दी बाते याद हो आयी…
“तो क्या वो माईकल था…?”
” हा…… तुम उसे जानते हो ना…………उसकी कब्र चर्च के पीछे है…………” मायूसी भरी आवाज में बोला
“क्या……… वो भी मर गया ……कैसे……”
“उसे तो मरना ही था… रूबी की रूह उसे छोडती क्या……… अरे हाय रे!!!!! मैं उसी रूबी का बाप हूं”
“अन्कल ……!!!” उस बूढे वेटर की आंखे गीली गो उठी।
मै लड़खडाता हुआ कमरे में आ गया और सर थाम कर बिस्तर पर बैठ गया। मैने अपने जिस्म पर पडे नाखून के खरोन्चो को स्पिरिट से साफ़ करने लगा। थोडी ही देर में लण्ड में सूजन आ गयी………
मेरा नाम जो हन्टर है। मैं २५ साल का इसाई युवक हूँ। मुझे घूमने फ़िरने का बहुत शौक है। इन गर्मी के दिनो में मुझे यह मौका मिल गया। हम सभी लोग जयपुर में एक जगह एकत्र हो गये थे। वहां से हमें बस में जाना था। हम सभी करीब १७ लोग थे। ज्यादातर जोड़े में थे। पर मैं अकेला ही था।
बस रात को लगभग १० बजे रवाना हुई। ऊपर वाले सभी स्लीपर थे और नीचे सीटें थी। मुझे सिंगल वाला स्लीपर मिल गया था। सुबह होते होते हम लोग उज्जैन पहुँच गये थे। यहां पर हम होटल में रुके थे। मुझे कमरा नम्बर २० मिला था।
मैं अपने कमरे में गया और नहा धो कर फ़्रेश हो गया। चाय पी कर सभी लोग घूमने निकल पड़े। मैंने उज्जैन देखा हुआ था इसलिये मैं पास में फ़्रीगन्ज मार्केट चला गया। पर जल्द ही वापस आ गया।
मैने होटेल के काऊन्टर पर देखा तो वहां पर एक खूबसूरत सी लड़की खड़ी थी। उसे देखते ही मैं पहचान गया। मैने अपने कमरे की चाबी मांगी। उसने मुझे १९ नम्बर की चाबी दी। मैने कहा,”अरे… रूबी तुम…!”
“हाय……जो…तुम हो…”
“ये तो १९ नम्बर की है……।”
“हा ये मेरा कमरा है… तुम चलो मैं आती हू।” रूबी मुस्करा कर बोली…
हम दोनो विद्यार्थी जीवन से साथ थे। मैं मन ही मन ही मन में रूबी को चाहता था, पर माईकल को यह पसन्द नहीं था।
“ओह्…हाँ………”
मैने चाबी ली और आराम से सीढियां चढ़ता हुआ कमरा नम्बर १९ पर आ गया। मैने चाभी लगा कर दरवाजा खोला। कमरे में एक अजीब सी ठन्डक थी। एकाएक मैने देखा कि रूबी कमरे में मेरे सामने खड़ी थी। एक झीना सा नाईट गाऊन पहने हुई थी। जिसमें उसका पूरा नंगा बदन नज़र आ रहा था। इतनी बेशर्मी से मै सकपका गया।
“तुम अन्दर कैसे आई…?”
“पीछे से ……दरवाजा तो बन्द कर दो… देखो मैं तो ……कोई देख लेगा ”
“अंह्…… हां …… पर ये क्या… तुम ऐसे …… ?” वास्तव में मै भौचक्का रह गया था।
“आओ ना…थोडी मस्ती करेंगे………भूल गये क्या सब……”
मै कैसे भूल सकता था भला……… हम दोनो एक साथ घूमने जाया करते थे …… मौका मिलने पर वो कभी मेरे लन्ड को मसल देती थी और कभी मेरी गान्ड पर थपथपाती थी। मुझे उसकी इस हरकत पर शरीर में सनसनी दौड जाती थी। मै भी मौका पाकर उसके उरोजो को दबा देता था। उसके नरम नरम चूतड़ों को दबा देता था। उसके नरम चूतड़ मुझे बहुत ही सेक्सी लगते थे। पर मुझे उसे चोदने का अवसर कभी नहीं मिला था।
आज ये अचानक सब कैसे हो गया। मेरी किस्मत अचानक ही कैसे खुल गयी। मै सीधे उसके पास आ गया और जोश में उसे जकड़ लिया। उसके ठन्डे बदन से मुझे एकबारगी झुरझुरी आ गयी। उसके ठन्डे होठ मेरे होन्ठो से चिपक गये। उसके मखमली बदन का अहसास मेरे जिस्म में होने लगा। मेरा लण्ड तन गया था। उसके नरम और ठन्डे बदन को मैं सहला रहा था। वो भी मेरे बदन से ऐसे लिपट रही थी कि कहीं मैं उसे छोड़ कर ना चला जाऊँ। मेरा लन्ड बहुत टाईट होता जा रहा था। मेरे बदन में सिरहन बढती जा रही थी। मेरा लन्ड रह रह कर चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था। रूबी बोली -”रुको……ऐसे नहीं……… तुम लेट जाओ…… और उतारो ये पेन्ट और कमीज………”
मै अपने कपड़े उतार कर उसके सामने नंगा हो गया। उसके मुँह से सीत्कार निकल गयी।
“जोऽऽऽऽऽऽ …… हाय रे……… तुम तो गजब के हो … तुम्हारा ये बोडी …… कहां छुपा रखा था ये बदन………”
“मै तो शुरु से ही ऐसा हूं ………क्यो ऐसा क्या है……” मुझे उसकी इस प्रतिक्रिया पर थोडी हैरानी हुई।
उसने कुछ नहीं सुना… बस मेरे नंगे बदन से लिपट गयी। मेरी तरफ़ उसने सेक्सी निगाहों से देखा और अपना झीना सा गाउन नीचे उतार फ़ेंका। मेरी नजरें उस से मिली। उसकी आखों में वासना के लाल डोरे खिन्चने लगे थे।
मेरे मुँह से भी निकल पड़ा -”हाय… ये चिकना चमचमाता शरीर……… रूबी ………जान लोगी क्या……” वो मुसकरा उठी।
रूबी ने अपने ठन्डे हाथों से मेरा लन्ड पकड लिया। अब वो मेरे लन्ड से खेल रही थी। मेरा लन्ड फ़ूल कर मोटा और कडक हो गया था। उसने मेरे सुपाडे की चमडी खींच कर उसे खोल दिया। अब वो उसे उपर नीचे कर रही थी। मुझे मीठी मीठी तेज गुदगुदी होने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़ना चाहा तो उसने प्यार से मेरा हाथ हटा दिया और मेरे लन्ड को पकड़ कर मुठ मारने लगी। मेरे सारे शरीर में सनसनाहट होने लगी।
“रूबी……… हाय……… मजा आ रहा है … और मुठ मार …… हाय……आज तो बस ऐसे ही मेरा रस निकाल दे रूबी………”
उसने मुठ मारते मारते अपने मुंह में सुपाडा ले लिया। उसके नाखून मेरे शरीर पर खरोन्चे मारने लगे। उत्तेजना में सब अच्छा लग रहा था। उसके हाथ और तेज चलने लगे… मुंह से लन्ड चूसने की मधुर आवाजें आ रही थी। उसके बाल लहरा रहे थे। मुठ मारती जा रही थी… रूबी का जिस्म भी कम्पकंपा रहा था। उसके पीछे उभरे हुये गोल गोल चूतड़ों को मैं मसल रहा था।
“राजा ……… मजा आ रहा है ना……” उसके नाखून मेरे शरीर पर खरोन्चे मार रहे थे। मै चरम सीमा पर पहुच रहा था। वो उतना ही तेज रगडने लगी थी। अब वो अपने दान्तो से मेरा सुपाडा भी चबा लेती थी। अन्तत: मैं मचल पडा…मेरा लन्ड से पिचकारी छूट पडी।
उसके चेहरे पर पर गाढ़ा गाढ़ा सा सफ़ेद वीर्य लिपट गया। उसने बेहिचक वीर्य को चाट चाट कर साफ़ कर दिया। रूबी उठी और बाथरुम में चली गयी। अपना मुँह साफ़ करके मेरे पास आ गयी।
“मजा आया जो…… तुम्हारा लन्ड… लगता है बडे प्यार से पाला है…।”
मै हंसने लगा……
तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया …… मैं उठा और पेन्ट पहन ली ।
मैने दरवाजा खोला तो वहां कोई नहीं था। मैने पीछे मुड़ कर देखा तो रूबी भी वहां नहीं थी। इतने में एक बूढा वेटर सामने के कमरे से निकला। मुझे देखते ही वो चोंक गया।
“सर … आपका कमरा तो २० नम्बर है……”
“ना…… नहीं… मैं तो यहां…।”
उसने मेरा रूम खोल दिया…। “आईये ……… उस कमरे में किसी भी हालत में मत जाना………”
” अच्छा …ठीक है ठीक है ……” मै हंस दिया।
मैने अपने कपड़े उठाये और अपने कमरे में आ गया। बूढे वेटर ने १९ नम्बर में ताला लगा दिया। मुझे पता था कि रूबी पीछे से निकल गयी होगी।
मै बिस्तर पर जा कर लेट गया। पता ही नहीं चला कि कब नीन्द ने आ घेरा। अचानक मेरी नीन्द खुल गयी। देखा तो रुबी अपने हाथ से मेरे शरीर को सहला रही थी। मै उठ कर बैठ गया। उसके सहलाने से मेरे लन्ड में तरावट आने लगी थी।
“तुम … यहां कैसे आ गयी ? दरवाजा तो बन्द था…”
“हाय।…… मेरे राजा……… वैसे ही … जैसे वहां आयी थी……”
“अच्छा ये बताओ कि माईकल का क्या हुआ… उसने तुमसे शादी नहीं की……तुम्हे तो वो बहुत प्यार करता था…”
” पर मै उसे इतना सा भी नहीं चाह्ती थी…… मै तो तुमसे प्यार करती थी…… और तुम ऐसे निकले कि मुझे छोड कर चले गये”
“पर शादी की बात तो उस से चल रही थी ना……”
“मुझे नहीं करनी थी शादी …उन्होने मुझे बहुत मारा पीटा… पर मै नहीं मानी……माईकल ने तो…अब क्या कहूं…… और फिर मजबूरन ……”
“क्या मजबूरन…… बोलो…”
“अरे… छोड़ो ना……इस मस्ती के समय में अच्छी बातें करो… मुझे तो तुम्हारा लन्ड बहुत प्यारा लगा……”
उसने मेरा पेन्ट खीच लिया……… फिर से मुझे नन्गा कर दिया। उसने भी बिना समय बरबाद किये अपना गाउन उतार फ़ेन्का। एक बार फ़िर से हम दोनों नन्गे थे।
“मेरे राजा… जल्दी करो…ऐसा मौका बार बार नहीं आता है……” उसने अपना शरीर मेरे शरीर से रगडना चालू कर दिया। फिर से हम एक बार वासना की दुनिया में पहुंचने लगे। उसके तीखे नाखून फिर से मेरे अंगों पर चुभने लगे… पहले की नाखूनो की जलन अब भी थी। पर उत्तेजना के कारण अब मह्सूस नहीं हो रही थी । मेरा लन्ड एक बार फिर उफ़न पडा…… मीठी सी जलन बढने लगी। उसके होन्ट मेरे होन्टो से चिपक गये। उसकी आंखे लाल हो उठी।
उसक शरीर जल उठा। उसके बदन में एक कडापन आ गया…। उसके उरोज कडे हो गये थे। मेरा लन्ड अब बहुत ही कडा हो गया था। मुझसे अब और नहीं सहा जा रहा था। मेरा लन्ड उसकी चूत में घुसने को बेताब होने लगा था। मैने थोडी सी हरकत करते हुये अपना लन्ड उसकी चूत में ठेल दिया।
“आऽऽऽह्……… जो … घुस गया रे …… सोलिड लन्ड है…… दे …धक्का मार यार।…”
‘ मेरी रूबी …… आऽऽऽऽऽ ह …… बहुत चिकनी है रे ……” लन्ड सरकता हुआ चूत में अन्दर तक बैठ गया।
“राजा…तुम्हरे लिये ही सम्हाल कर रखी थी……” उसकी लाल लाल आंखो मै वहशीपन साफ़ झलक रहा था। तभी उसने मेरा लन्ड बाहर निकाला और उसने तुरन्त मुझे उठाया और खुद घोड़ी बन गयी।
“राजा मेरी गान्ड मारो …। बडी बैचनी लग रही है…… देखो ना……सिर्फ़ तुम्हारे लिये मैने इस गान्ड को कुंआरी रखी है।”
मुझे होश कहां था। मेरा लन्ड कडकता जा रहा था… मेर सुपाडा भी गीला हो रहा था। मैने उसके चूतडो की फ़ान्को को खोला और उसकी गान्ड के छेद पर लन्ड रख दिया। और……वो चिल्ला उठी…।
“धक्का दे जोऽऽऽऽ … घुसेड़ दे लन्ड को……”
‘उसने अपनी गान्ड का छेद को हाथ से फ़ैला दिया। उसका छेद पूरा खुल गया। मैने लन्ड जोर लगा कर अन्दर बैठा दिया। मुझे उसकी गान्ड के छेद नरम लगा। बडी आसानी से…, बिना किसी तकलीफ़ के अन्दर घुसता चला गया। इतना कि मेरा पूरा लन्ड ही अन्दर चला गया। तभी उसने अपनी गान्ड सिकोड़ ली। इतनी जोर से सिकोडने से मेरे लन्ड पर चोट लग गयी। पर उसका चिल्लाना जारी रहा।
“चोद दे राजा …आऽऽऽह्……… मजा आ रहा है…” मै दर्द के मारे तडप उठा। उसकी गान्ड का कसाव तकलीफ़ दे रहा था।
“रूबी………… ढीला करो… क्या कर रही हो……”
‘उसने पीछे मुड कर मुझे देखा…और अपनी गान्ड ढीली छोड दी… उसकि आंखो में एक वहशीपन था…। उसकी आंखों में जैसे खून उतर आया हो। वो एक कुटिल मुस्कान देती हुयी बोली…”राजा… बडी प्यासी है मेरी गान्ड……प्लीज्… लगाओ धक्के पर धक्का…… आज प्यास बुझा दो मेरी…।”
मैने उसकी गान्ड चोदनी शुरु कर दी। वो भी अपने चूतड़ों को हिला हिला कर साथ दे रही थी। मै अपने होश खोता जा रहा था। मै उसकी गान्ड मराने कि स्टाइल पर फ़िदा हो गया… अब उसकी गान्ड मक्खन की तरह नरम लग रही थी। मुझे लगा कि मैं चरमसीमा पर पहुँचने वाला हूँ तभी रूबी ने गान्ड से लन्ड निकाल दिया।
शायद वो जान गई थी कि मैं थोडी देर में झड़ जाऊंगा। और लन्ड गान्ड से निकाल कर अपनी चूत में घुसा लिया……
” हाय मर गयी ……” रूबी के मुह से सिस्कारी निकल पडी। चूत पूरी गीली थी…… लन्ड सरकता हुआ अन्दर चला गया। मेरे लन्ड में तेज गुदगुदी उठी… ये उसकी कसी हुई चूत का कमाल था। लन्ड पूरा अन्दर घुस कर जैसे ही बाहर निकला … रूबी के मुँह से तेज सिस्कियां निकलने लगी। उसे देख कर मेरा लन्ड भी पिघलने लगा………लन्ड के अन्दर बाहर चलने की मेरी रफ़्तार बढ गयी। जोर लगा कर लन्ड पेलने लगा…। उसके चूतड़ जोर से उछल उछल कर मेरा साथ दे रहे थे।
“हाय…राजा……कस के चोद दे…………दे रे जोर से धक्के दे…… मेरी फाड़ दे………… हाय रे………”
वो पागलो की तरह चुदा रही थी। जैसे कि आगे अब उसे चुदने को नहीं मिलेगा। मेरी अब सहनशीलता खतम होती जा रही थी… पर जैसे रूबी सब जानती थी। स्खलित होने के अन्दाज में वो चीख उठी…”राजा मै तो गयी………… लगा दे पूरा जोर…। निकाल दे मेरा पानी……… हाय रे……… मै तो गयी…॥”
“रानीऽऽऽऽ मैं भी गया…। मेरा भी निकला … हाऽऽऽऽऽऽऽऽ निकला ओओओऽऽऽऽऽऽ……”
रूबी झड़ने लगी थी ………… मेरा लगभग उसके साथ ही वीर्य निकल पडा। वीर्य निकलने के साथ ही मेरा सारा जोश ठन्डा पडता जा रहा था। अचानक मेरी नजरे उसकी चूत पर पडी।
उसमें से वीर्य के साथ खून भी आ रहा था…। मै खुश हो गया कि रूबी अब तक मेरे लिये कुँआरी थी। रूबी ने अन्गडाई ली और तुरन्त उछल कर बिस्तर से नीचे आ गयी। उसने नीचे देखा और उसने अपनी चूत से खून भरा वीर्य टपकते देखा और हंसती हुयी बोली -
“जो… मजा आ गया राजा…फिर कभी मौका मिलेगा तो मै तुम्हारे पास प्यास बुझाने आउंगी…। देखो मना मत करना………। नहीं तो……………।” उसने मुझे तिरछी नजरो से घूरा। मैं सहम सा गया। फिर वो बाथरूम में चली गयी। मै थोडी देर बैठा रहा। अचानक मेरे लन्ड में दर्द उठा। मैन देखा तो मेरे लन्ड से खून की बून्दे टपक रही थी। लग रहा था कि लन्ड की कोई नस फ़ट गयी है…। या कोई चोट लग गयी है। लन्ड की त्वचा जगह जगह से फ़ट गयी थी। तो वह खून उसकी चूत में से नहीं… मेरे लन्ड का था……।
मै बाथरूम में गया तो वहां कोई नहीं था……… न कोई खिड़की …न कोई दरवाजा… न कोई रोशनदान…। ये क्या हुआ…। कहां गयी रूबी……। मैंने अपने लन्ड को पानी से धोया। मैने पेन्ट पहना और बाहर आया। वही बूढ़ा वेटर वहाँ से निकल रहा था। मैंने उसे बुलाया,”वेटर … सुनो…… यहां पर काउन्टर पर जो लड़की बैठती है …वो रूबी नाम है…”
“ज़ीऽऽऽ क्या कहा आपने… हमारे होटल में कोई लडकी काम नहीं करती है………” वो बचता हुआ आगे जाने लगा।
“अरे वो … जिसका कमरा नम्बर १९ है…………”
“देखिये साहब … कमरा नम्बर १९ हम किसी को नहीं देते हैं………… वहां पर किसी ईसाई लडकी ने आत्महत्या कर ली थी…। मैने नहीं कहा था, इस कमरे में मत जाना…।”
“नही…… नहीं……कमरे की नहीं… मै रूबी की बात कर रहा हूँ………वैसे उस कमरे में ऐसा क्या है…” उसने मुड कर मुझे देखा ……और उसका स्वर कमजोर हो गया……
“हां… मै जानता हूँ…तुम्हें भी… तुम जो हन्टर हो ना…तुम रूबी ही की बात कर रहे हो……और कमरा……उसके कमीने प्रेमी ने उसका बलात्कार यही किया था………।”
मै सुन कर सन्न रह गया ………… तो क्या माईकल ने………… उसे रूबी दी बाते याद हो आयी…
“तो क्या वो माईकल था…?”
” हा…… तुम उसे जानते हो ना…………उसकी कब्र चर्च के पीछे है…………” मायूसी भरी आवाज में बोला
“क्या……… वो भी मर गया ……कैसे……”
“उसे तो मरना ही था… रूबी की रूह उसे छोडती क्या……… अरे हाय रे!!!!! मैं उसी रूबी का बाप हूं”
“अन्कल ……!!!” उस बूढे वेटर की आंखे गीली गो उठी।
मै लड़खडाता हुआ कमरे में आ गया और सर थाम कर बिस्तर पर बैठ गया। मैने अपने जिस्म पर पडे नाखून के खरोन्चो को स्पिरिट से साफ़ करने लगा। थोडी ही देर में लण्ड में सूजन आ गयी………
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